नमस्ते दोस्तों मेरा नाम अमृत वर्मा है। मेरे कई शौक में से एक शायरी लिखना भी है। यहाँ मैनें अपनी 100 खूबसूरत शायरी दिल से लिखी है... उम्मीद है आपको पसन्द आएगी।
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| 100 खूबसूरत शायरी दिल से |
1-हार गएं सभी आँसू मेरे खोज के
मैं कभी रोता नहीं सिवाय रोज के॥
2-बहते हुए धारों के सहारे चलते रहते हैं
समन्दर वही रहता है बस किनारे बदलते रहते हैं॥
3-बेवजह उनकी मेहफिल से बेदखल होते हैं
उनसे तो कहीं खूबसूरत हमारे गज़ल होते हैं॥
4-कितने जालिम ये छलकते जाम हूआ करते हैं
जिसकी खातिर ही तो हम बदनाम हुआ करते हैं॥
5-बस करो ये जुर्म जितनें अब तलक हो गएं
नजरें बरस बनीं बादल पलकें फलक हो गएं॥
3-बेवजह उनकी मेहफिल से बेदखल होते हैं
उनसे तो कहीं खूबसूरत हमारे गज़ल होते हैं॥
4-कितने जालिम ये छलकते जाम हूआ करते हैं
जिसकी खातिर ही तो हम बदनाम हुआ करते हैं॥
5-बस करो ये जुर्म जितनें अब तलक हो गएं
नजरें बरस बनीं बादल पलकें फलक हो गएं॥
6-कभी हम मेहफिलों में भी रोते थें
आज जिंदगी के दिए जख्मों पर हंसी आती है॥
7-जो बातें अक्सर हुस्नों में हुआ करते हैं
दोस्तों से कहीं ज्यादा दुश्मनों में हुआ करते हैं॥
8-टूटे हुए मेहफिल में जब शाम होते हैं
मेरे दिल में आए कातिल भी मेरे मेहमान होते हैं॥
9-जब से तुम मेरे अजीज हो गए
7-जो बातें अक्सर हुस्नों में हुआ करते हैं
दोस्तों से कहीं ज्यादा दुश्मनों में हुआ करते हैं॥
8-टूटे हुए मेहफिल में जब शाम होते हैं
मेरे दिल में आए कातिल भी मेरे मेहमान होते हैं॥
9-जब से तुम मेरे अजीज हो गए
लगता है जहर भी लजीज हो गए॥
10-खुशियों के इस बाजार में मेरा दर्द बिकता नहीं
मुझे जख्म भी हुआ है ऐसा जो दिखता नहीं॥
11-हमें कहाँ नामंजूर था यूँ मुद्दतों से अकेले रहना
कुछ वक्त के लिए तुम आए और ना जाने क्यूँ अकेला कर गए॥
12-याद करते रहें उन्हें हम रात रात भर
और उन्होंनें हमें रातोरात भुला दिया॥
13-दिल को चलाने की जाँच पङताल चल रही है
कि इन दिनों धङकनों की हङताल चल रही है॥
14-तेरी बेवफाईयों का गम हर पल सहते आए हैं
आगे क्यूँ नहीं रह लेंगें तनहा जब अब तक रहते आए हैं॥
15-चलते हैं हम समन्दर में कूद जाएंगें
हमारे साथ इनमें हमारे गम भी डूब जाएंगें॥
16-ना जाने किसने अम्बर पे बादलों का पहरा लगा दिया
देखते ही देखते बादलों नें तेरा चेहरा बना दिया॥
11-हमें कहाँ नामंजूर था यूँ मुद्दतों से अकेले रहना
कुछ वक्त के लिए तुम आए और ना जाने क्यूँ अकेला कर गए॥
12-याद करते रहें उन्हें हम रात रात भर
और उन्होंनें हमें रातोरात भुला दिया॥
13-दिल को चलाने की जाँच पङताल चल रही है
कि इन दिनों धङकनों की हङताल चल रही है॥
14-तेरी बेवफाईयों का गम हर पल सहते आए हैं
आगे क्यूँ नहीं रह लेंगें तनहा जब अब तक रहते आए हैं॥
15-चलते हैं हम समन्दर में कूद जाएंगें
हमारे साथ इनमें हमारे गम भी डूब जाएंगें॥
16-ना जाने किसने अम्बर पे बादलों का पहरा लगा दिया
देखते ही देखते बादलों नें तेरा चेहरा बना दिया॥
17-दिन वो शायद ही कभी पास आए
जब ये दुनिया मुझे रास आए॥
18-अब तो हम पत्थरों से भी दिल लगाया करते हैं
कि पत्थरों को अक्सर पत्थर ही भाया करते हैं॥
19-मंजूर है कि दिल वो हमारा रोजाना ही तोङ दें
पर क्या हम उनकी गली में जाना ही छोङ दें॥
20-माना कि गमों को बाँटना फिजूल नहीं
पर मेरे दर्द से ये दुनिया मेहरूम नहीं॥
21-चले गएं वो सब कुछ छोङकर अपनी दुनिया में
ना जाने कैसे सब कुछ में हम भी छूट गएं॥
22-छोङ दिया हमनें शराबखाने में जाना
कि तेरी नजरो में ही हमें नश-ए-शराब मिलता है॥
18-अब तो हम पत्थरों से भी दिल लगाया करते हैं
कि पत्थरों को अक्सर पत्थर ही भाया करते हैं॥
19-मंजूर है कि दिल वो हमारा रोजाना ही तोङ दें
पर क्या हम उनकी गली में जाना ही छोङ दें॥
20-माना कि गमों को बाँटना फिजूल नहीं
पर मेरे दर्द से ये दुनिया मेहरूम नहीं॥
21-चले गएं वो सब कुछ छोङकर अपनी दुनिया में
ना जाने कैसे सब कुछ में हम भी छूट गएं॥
22-छोङ दिया हमनें शराबखाने में जाना
कि तेरी नजरो में ही हमें नश-ए-शराब मिलता है॥
23-जमाना कहता है जालिम समझता नहीं जज्बातों को
हमें जमाना जो अगर समझ जाता तो हम जालिम नहीं बनतें॥
24-कर के टुकङे शीशे के फेंका हमारी राहों में
दिल के टुकङे जबकि मौजूद थें हमारी बाहों में॥
25-जालिम है ये जमाना कोई करे भी तो क्या
मर के भी चैन नहीं आता कोई मरे भी तो क्या॥
26-उनसे दिल लगाना सौदा-ए-नफा है
रिस्तों से कहीं ज्यादा वो खुद बेवफा हैं॥
27-इस दुनिया में जब इंसां नहीं हुआ करते थें
जलती थी आग मगर हिंसा नहीं हुआ करते थें॥
28-दिल की गलियों में ही दिल उनका बदनाम होता है
प्यार जिन्हें अक्सर सरेआम होता है॥
29-बुज्दिल कह कर हम पे वो ऐतबार ही नहीं करतें
अरे बुज्दिल जो होतें हम अगर तो तुमसे प्यार ही नहीं करतें॥
30-हमें नहीं पता क्या होती है शराब
नशे में जो डूबे रहते हैं उनके दिन रात॥
31-खुश वो दरअसल होते हैं
आशियाने में जिनके हमसफर होते हैं॥
32-तेरी आँखों में चमक सा कुछ हमेशा रहता है
कि जब तक खुली रहती हैं तेरी नजरें, तब तक सवेरा रहता है॥
33-कोई नहीं होता जब याद तेरी आती है
कहें भी तो किससे ये दिल की बात
कि हवा आती है चली जाती है॥
34-कभी शराब तो कभी अश्कों को पीना है
इस मौत सी जिन्दगी में बस यही हमारा जीना है॥
35-पेङों जैसा हूँ पत्ते जितने हैं अरमान
छोटा हूँ जरा वरना छू लेता आसमान॥
36-मरे हुए जिस्म को उन्होंनें हाँथ लगा दिया
बुझ गई चिन्गारी तो धुंवे नें आग लगा दिया॥
37-भुलाना जो चाहा तुझे फिर से तेरी याद आई
पीया जहर तो मौत भी तेरी याद के बाद आई॥
38-मेला है बर्बादियों का फिर भी खरीददारी करते हो
इश्क में दिल की क्यूँ इतनी लापरवाही करते हो॥
39-लगेगा काफी वक्त मेरी हँस्ती को तुझे मिटाने में
कि मेरे सिवा जिन्दा हैं अभी बहुत से शायर इस जमाने में॥
40-हर पल हर लमहा जो हम सहा करते हैं
कोई बता दे इसे क्या कहा करते हैं॥
41-अब तो गम भी हमसे तहजीब लिया करते हैं
शराब नहीं मिलता तो अपने अपने अश्क ही पिया करते हैं॥
42-जमाने से अपना गम बताया नहीं करतें
धङकनें रूकी हैं दिल की इसलिए सुनाया नहीं करतें॥
43-क्या पङेगा फर्क गर मर जाएं इक दफा
कि दिल के हमारे अरमान तो अक्सर ही मरा करते हैं॥
44-तनहाई में रहने वालों को आलम से क्या लेना
बरस रही हों नजरें ऐसे में मौसम से क्या लेना॥
45-यूँ तो हर कोई हमें सताया करते हैं
खुद के गज़ल पढ के मुस्कुराया करते हैं॥
46-चट्टानों ने भी प्यार में दिल लगाके खुदकुशी कर ली
कि हमनें खुद उन्हें पर्वतों से खाई में गिरते देखा है॥
47-प्यार मैं कर लूँ ये दिल का अरमान कहता है
पर सुना है प्यार करने वाला भी परेशान रहता है॥
48-यूँ तो तूनें देखे होंगें मुझ जैसे आशिक हजार
पर तुझ जैसे बेवफा भी हमनें कुछ कम नहीं देखें॥
49-मेरी बीती हुई तनहाईयों में वो शामिल नहीं थें
शायद हम ही उनके प्यार के काबिल नहीं थें॥
50-तुम्हें पाने की चाहत रह जाएगी अधूरी
दो चार पल और जी लिया तो हो जाएगी जिन्दगी पूरी॥
51-अमादा तो नहीं हैं तेरे हुस्न का मगर
तेरा हुस्न ही हम पे उतारू हो गया है॥
52-हवाओं में अफवाहें अब तो लहरें भी उङाते हैं
किनारे पर जब वो तनहा हमें पाते हैं॥
53-दो पल की चन्द मुलाकातें फिरेंगें
झूठे प्यार के बातें फिरेंगें
आएगा एक दिन जमाना ऐसा
जब हर कोई दिल लगाते फिरेंगें॥
54-दिनों के उजाले में हमनें चराग जला डालें
ऐ काश कहीं से तेरा चेहरा नजर आ जाता॥
55-बैठे थें लिए साथ वो तिनका छूट गया
आई तेरी याद और दिल टूट गया॥
56-देखा था हमनें तुम्हें जब पहली दफा
हो गया था यकीं कि जल्द ही बर्बाद होने को हैं॥
57-दिल को बहलाने का कोई बहाना न था
जब तेरा अपनी गलियों में आना न था॥
58-मेरे दिल का आज तक सौदा नहीं हुआ
हमसे जो दिल लगाए ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ॥
59-शरमाना कैसा कि पेशा ये सारे जमाने का है
जवानी में यही तो मौका अपना दिल आजमाने का है॥
60-बदल गएं कई मौसम पर उनका चेहरा नहीं बदला
कि आज भी उन पर लगाया हुआ हमारा पेहरा नहीं बदला॥
61-तेरे मेरे बीच ये सिलसिला नहीं यूँ ही है
जो तस्वीर तुझे भेज रहा हूँ तेरा आईना नहीं तू ही है॥
62-हर फूलों हर कलियों को जला डाला हमनें
मोम को भी सीने से लगा के गला डाला हमनें॥
63-तितली और भँवरे में हो गई तकरार
क्योंकि दोनों एक ही फूल से करते थें प्यार॥
64-लिखते लिखते ये कैसी रौशनी चली आई
कि अब चलते हैं रात हमनें अच्छी बिताई॥
हमें जमाना जो अगर समझ जाता तो हम जालिम नहीं बनतें॥
24-कर के टुकङे शीशे के फेंका हमारी राहों में
दिल के टुकङे जबकि मौजूद थें हमारी बाहों में॥
25-जालिम है ये जमाना कोई करे भी तो क्या
मर के भी चैन नहीं आता कोई मरे भी तो क्या॥
26-उनसे दिल लगाना सौदा-ए-नफा है
रिस्तों से कहीं ज्यादा वो खुद बेवफा हैं॥
27-इस दुनिया में जब इंसां नहीं हुआ करते थें
जलती थी आग मगर हिंसा नहीं हुआ करते थें॥
28-दिल की गलियों में ही दिल उनका बदनाम होता है
प्यार जिन्हें अक्सर सरेआम होता है॥
29-बुज्दिल कह कर हम पे वो ऐतबार ही नहीं करतें
अरे बुज्दिल जो होतें हम अगर तो तुमसे प्यार ही नहीं करतें॥
30-हमें नहीं पता क्या होती है शराब
नशे में जो डूबे रहते हैं उनके दिन रात॥
31-खुश वो दरअसल होते हैं
आशियाने में जिनके हमसफर होते हैं॥
32-तेरी आँखों में चमक सा कुछ हमेशा रहता है
कि जब तक खुली रहती हैं तेरी नजरें, तब तक सवेरा रहता है॥
33-कोई नहीं होता जब याद तेरी आती है
कहें भी तो किससे ये दिल की बात
कि हवा आती है चली जाती है॥
34-कभी शराब तो कभी अश्कों को पीना है
इस मौत सी जिन्दगी में बस यही हमारा जीना है॥
35-पेङों जैसा हूँ पत्ते जितने हैं अरमान
छोटा हूँ जरा वरना छू लेता आसमान॥
36-मरे हुए जिस्म को उन्होंनें हाँथ लगा दिया
बुझ गई चिन्गारी तो धुंवे नें आग लगा दिया॥
37-भुलाना जो चाहा तुझे फिर से तेरी याद आई
पीया जहर तो मौत भी तेरी याद के बाद आई॥
38-मेला है बर्बादियों का फिर भी खरीददारी करते हो
इश्क में दिल की क्यूँ इतनी लापरवाही करते हो॥
39-लगेगा काफी वक्त मेरी हँस्ती को तुझे मिटाने में
कि मेरे सिवा जिन्दा हैं अभी बहुत से शायर इस जमाने में॥
40-हर पल हर लमहा जो हम सहा करते हैं
कोई बता दे इसे क्या कहा करते हैं॥
41-अब तो गम भी हमसे तहजीब लिया करते हैं
शराब नहीं मिलता तो अपने अपने अश्क ही पिया करते हैं॥
42-जमाने से अपना गम बताया नहीं करतें
धङकनें रूकी हैं दिल की इसलिए सुनाया नहीं करतें॥
43-क्या पङेगा फर्क गर मर जाएं इक दफा
कि दिल के हमारे अरमान तो अक्सर ही मरा करते हैं॥
44-तनहाई में रहने वालों को आलम से क्या लेना
बरस रही हों नजरें ऐसे में मौसम से क्या लेना॥
45-यूँ तो हर कोई हमें सताया करते हैं
खुद के गज़ल पढ के मुस्कुराया करते हैं॥
46-चट्टानों ने भी प्यार में दिल लगाके खुदकुशी कर ली
कि हमनें खुद उन्हें पर्वतों से खाई में गिरते देखा है॥
47-प्यार मैं कर लूँ ये दिल का अरमान कहता है
पर सुना है प्यार करने वाला भी परेशान रहता है॥
48-यूँ तो तूनें देखे होंगें मुझ जैसे आशिक हजार
पर तुझ जैसे बेवफा भी हमनें कुछ कम नहीं देखें॥
49-मेरी बीती हुई तनहाईयों में वो शामिल नहीं थें
शायद हम ही उनके प्यार के काबिल नहीं थें॥
50-तुम्हें पाने की चाहत रह जाएगी अधूरी
दो चार पल और जी लिया तो हो जाएगी जिन्दगी पूरी॥
51-अमादा तो नहीं हैं तेरे हुस्न का मगर
तेरा हुस्न ही हम पे उतारू हो गया है॥
52-हवाओं में अफवाहें अब तो लहरें भी उङाते हैं
किनारे पर जब वो तनहा हमें पाते हैं॥
53-दो पल की चन्द मुलाकातें फिरेंगें
झूठे प्यार के बातें फिरेंगें
आएगा एक दिन जमाना ऐसा
जब हर कोई दिल लगाते फिरेंगें॥
54-दिनों के उजाले में हमनें चराग जला डालें
ऐ काश कहीं से तेरा चेहरा नजर आ जाता॥
55-बैठे थें लिए साथ वो तिनका छूट गया
आई तेरी याद और दिल टूट गया॥
56-देखा था हमनें तुम्हें जब पहली दफा
हो गया था यकीं कि जल्द ही बर्बाद होने को हैं॥
57-दिल को बहलाने का कोई बहाना न था
जब तेरा अपनी गलियों में आना न था॥
58-मेरे दिल का आज तक सौदा नहीं हुआ
हमसे जो दिल लगाए ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ॥
59-शरमाना कैसा कि पेशा ये सारे जमाने का है
जवानी में यही तो मौका अपना दिल आजमाने का है॥
60-बदल गएं कई मौसम पर उनका चेहरा नहीं बदला
कि आज भी उन पर लगाया हुआ हमारा पेहरा नहीं बदला॥
61-तेरे मेरे बीच ये सिलसिला नहीं यूँ ही है
जो तस्वीर तुझे भेज रहा हूँ तेरा आईना नहीं तू ही है॥
62-हर फूलों हर कलियों को जला डाला हमनें
मोम को भी सीने से लगा के गला डाला हमनें॥
63-तितली और भँवरे में हो गई तकरार
क्योंकि दोनों एक ही फूल से करते थें प्यार॥
64-लिखते लिखते ये कैसी रौशनी चली आई
कि अब चलते हैं रात हमनें अच्छी बिताई॥
65-भरी महफिल में हमें वो बदनाम भी कर दें तो परवाह नहीं
नजर से दूर उसने जो किया वो हमें गवारा ना था॥
66-बैठे थें उनके साथ उनकी ही यादों में
चलते हैं रात भी हो गई, फिर मिलेंगें ख्वाबों में॥
67-न ही किसी चीज की फरियाद होती है
मेहफिलों में जिनके तेरी याद होती है॥
68-बैठे हैं हम बेसहारे हुए
खङे हैं वो बाँह पसारे हुए
दोनों को है इस बात का गम
दोनों हैं प्यार के मारे हुए॥
69-गुलाबों चमन सी मुस्कुराहट ये सादगी बङी जालिम है
कहती है दुनिया फरिस्ता जिसे वही तो सबका कातिल है॥
70-जिन्दगी नें भी हमसे अजीब सवालात किया है
चलना होगा हमें कि गमों ने एक बार फिर याद किया है॥
71-जोङ लिया हमनें दुश्मनों से नाता
कि दोस्तों में हम पर कोई सितम नहीं ढाता॥
72-खामोश रहो हवाओं कि राहत मिलती रहे
उन खोए हुए कदमों की आहट मिलती रहे॥
73-दुश्मनों को तेरी देखकर फरिस्ते नें कमान साधा था
तेरी मेहफिल में आकर हमनें ही समा बांधा था॥
66-बैठे थें उनके साथ उनकी ही यादों में
चलते हैं रात भी हो गई, फिर मिलेंगें ख्वाबों में॥
67-न ही किसी चीज की फरियाद होती है
मेहफिलों में जिनके तेरी याद होती है॥
68-बैठे हैं हम बेसहारे हुए
खङे हैं वो बाँह पसारे हुए
दोनों को है इस बात का गम
दोनों हैं प्यार के मारे हुए॥
69-गुलाबों चमन सी मुस्कुराहट ये सादगी बङी जालिम है
कहती है दुनिया फरिस्ता जिसे वही तो सबका कातिल है॥
70-जिन्दगी नें भी हमसे अजीब सवालात किया है
चलना होगा हमें कि गमों ने एक बार फिर याद किया है॥
71-जोङ लिया हमनें दुश्मनों से नाता
कि दोस्तों में हम पर कोई सितम नहीं ढाता॥
72-खामोश रहो हवाओं कि राहत मिलती रहे
उन खोए हुए कदमों की आहट मिलती रहे॥
73-दुश्मनों को तेरी देखकर फरिस्ते नें कमान साधा था
तेरी मेहफिल में आकर हमनें ही समा बांधा था॥
74-जब से होश संभाला है खुद को तनहा पाया है
बेदर्दी इस धूप में मेरी बेबसी का साया है॥
75-मुहल्ले वालों नें बन्द कर रखा है दरवाजा रोजाना ही अब तो
कि छोङ दिया उस शोख नें मेरी गली से गुजर जाना ही अब तो॥
76-इंतजार में उनकी घंटे एक से सवा हो गएं
याद में उनकी चलते चलते जख्म भी दवा हो गएं
उम्मीद है मेरे दिल को कि वो आएगी जरूर
इस बात के फिजाएं भी अब गवाह हो गएं॥
77-तेरे पैरों से अगर मेरी लाश भी कुचली जाएगी
खूनी कदमों का पीछा कर रूह तुझ तक पहुँच जाएगी॥
78-तेरी आँखें नहीं ये शराब हैं
स्वाद भी जिसकी लाजवाब है
शराबी हूँ मैं पी लेने दे मुझे
यही आदत तो मेरी सबसे खराब है॥
79-कैसे सुला सकते हैं इस सीने पर उनको
कि नाजुक से मेरे मेहबूब को ये धङकनें जगा देंगीं॥
80-देंगें तेरी बेवफाईयों क जवाब, पर आँसू पोंछ कर देंगें
देंगें अगर अबसे किसी को दिल, तो जरा सोच कर देंगें॥
81-बेवफाईयों का सिलसिला अब आम हो गया
दगाबाजों की भीङ में रास्ता जाम हो गया
उम्मीद थी सिर्फ तुझसे तूने भी छोङ दी वफा
मेरे दिल का कत्ल भी सरेआम हो गया॥
75-मुहल्ले वालों नें बन्द कर रखा है दरवाजा रोजाना ही अब तो
कि छोङ दिया उस शोख नें मेरी गली से गुजर जाना ही अब तो॥
76-इंतजार में उनकी घंटे एक से सवा हो गएं
याद में उनकी चलते चलते जख्म भी दवा हो गएं
उम्मीद है मेरे दिल को कि वो आएगी जरूर
इस बात के फिजाएं भी अब गवाह हो गएं॥
77-तेरे पैरों से अगर मेरी लाश भी कुचली जाएगी
खूनी कदमों का पीछा कर रूह तुझ तक पहुँच जाएगी॥
78-तेरी आँखें नहीं ये शराब हैं
स्वाद भी जिसकी लाजवाब है
शराबी हूँ मैं पी लेने दे मुझे
यही आदत तो मेरी सबसे खराब है॥
79-कैसे सुला सकते हैं इस सीने पर उनको
कि नाजुक से मेरे मेहबूब को ये धङकनें जगा देंगीं॥
80-देंगें तेरी बेवफाईयों क जवाब, पर आँसू पोंछ कर देंगें
देंगें अगर अबसे किसी को दिल, तो जरा सोच कर देंगें॥
81-बेवफाईयों का सिलसिला अब आम हो गया
दगाबाजों की भीङ में रास्ता जाम हो गया
उम्मीद थी सिर्फ तुझसे तूने भी छोङ दी वफा
मेरे दिल का कत्ल भी सरेआम हो गया॥
82-जी लेंगें ऐ जिन्दगी शौक से तुझे
बस इक दफा तू हमें हाँसिल हो जाए॥
बस इक दफा तू हमें हाँसिल हो जाए॥
83-फुरसत में तलाश करना मेरे कदमों के निशां
मिलेगी कब्र मेरी जहाँ खत्म होंगें निशां॥
84-अच्छा नहीं लगता यूँ शातिरों से दिल लगाना
कि जालिमों से दिल लगा के दिल बदनाम होता है
भीङ में हसीनाओं के खन्जर मारी है सीने पे
कि देखते हैं कोन हमपे मेहरबान होता है॥
85-बैठा था मैं आशियाने में बादलों के
हवा उसे भी अपने साथ ले गई
छीन लिया सब कुछ मेरी जिन्दगी नें मुझसे
आखिरकार खाली मेरी हाँथ रह गई
सोचा था रेत से ही सही पर बनाऊँगा अपना घर
पर वो भी मेरे अश्कों के साथ बह गई॥
86-एक बात जो सबको बताया करते हैं
रातों को जो हमें सताया करते हैं
ख्वाब में आते हैं तो ख्वाब ही सही
पर फरिस्ते भी झलक दिखलाया करते हैं॥
87-करके वो वादे अपने अक्सर भूला करते हैं
किस्मत के हमारे दरवाजे भी आधे खुला करते हैं॥
88-हाँसिल कुछ चीजें गँवाने में भी हुआ करते हैं
दिल का सौदा इस जमाने में भी हुआ करते हैं॥
मिलेगी कब्र मेरी जहाँ खत्म होंगें निशां॥
84-अच्छा नहीं लगता यूँ शातिरों से दिल लगाना
कि जालिमों से दिल लगा के दिल बदनाम होता है
भीङ में हसीनाओं के खन्जर मारी है सीने पे
कि देखते हैं कोन हमपे मेहरबान होता है॥
85-बैठा था मैं आशियाने में बादलों के
हवा उसे भी अपने साथ ले गई
छीन लिया सब कुछ मेरी जिन्दगी नें मुझसे
आखिरकार खाली मेरी हाँथ रह गई
सोचा था रेत से ही सही पर बनाऊँगा अपना घर
पर वो भी मेरे अश्कों के साथ बह गई॥
86-एक बात जो सबको बताया करते हैं
रातों को जो हमें सताया करते हैं
ख्वाब में आते हैं तो ख्वाब ही सही
पर फरिस्ते भी झलक दिखलाया करते हैं॥
87-करके वो वादे अपने अक्सर भूला करते हैं
किस्मत के हमारे दरवाजे भी आधे खुला करते हैं॥
88-हाँसिल कुछ चीजें गँवाने में भी हुआ करते हैं
दिल का सौदा इस जमाने में भी हुआ करते हैं॥
89-यूँ तो रहा करते हैं जमाने वालों से अलग
पर उनमें से ही किसी से प्यार हो जाए तो क्या करें॥
90-बसा के तुझे निगाहों में ये अश्क पसीजे हैं
गमों के गुलशन को गुजरे दर्द से सींचे हैं॥
91-हमारी आपकी किस्मत में सिर्फ जुदाई क्यों है
मिलता नहीं जब प्यार किसी को तो खुदा नें बनाई क्यों है॥
92-गमों के दौर में हर पल ही नयी पहचान लेकर
मिला करते हैं जमाने से चेहरे पे झूठी मुस्कान लेकर॥
93-काश जिन्दगी के सफर में एक ऐसा भी पहर आता
जी लेतें दो पल सुकून के तो जिन्दगी का क्या बिगङ जाता॥
94-लब्जों से बयाँ न कर सकें तो कोई गम नहीं
सुना है मुहब्बत में नजरें भी बातें करती हैं॥
95-मार ही डाला आखिर तेरी अदाओं नें हमें
वरना अपने हाँथों की लकीरें काफी लम्बी हुआ करती थीं॥
96-अब तो खिलौनों से दिल बहलता नहीं अपना
जबसे खिलौना बनाकर उसनें खेला है हमें॥
97-कतरा कतरा कर के जिन्दगी जुटाते जा रहे हैं
धीरे धीरे कर के तुझपे लुटाते जा रहे हैं॥
98-कितने हँसीं वो बिछङे जमाने होते थें
फूलों में कलियों में अपने आशियाने होते थें॥
99-गज़ल में दिल के अपने सारे अरमान निकल जाते हैं
रूठकर धङकनें दिल से अपनी खुद ही बहल जाते हैं॥
100-खुदा नें उन्हें बनाया है सिर्फ हमारे लिये
झेल लेंगें उनके बिना ये जिन्दगी कुँवारे लिये॥
पर उनमें से ही किसी से प्यार हो जाए तो क्या करें॥
90-बसा के तुझे निगाहों में ये अश्क पसीजे हैं
गमों के गुलशन को गुजरे दर्द से सींचे हैं॥
91-हमारी आपकी किस्मत में सिर्फ जुदाई क्यों है
मिलता नहीं जब प्यार किसी को तो खुदा नें बनाई क्यों है॥
92-गमों के दौर में हर पल ही नयी पहचान लेकर
मिला करते हैं जमाने से चेहरे पे झूठी मुस्कान लेकर॥
93-काश जिन्दगी के सफर में एक ऐसा भी पहर आता
जी लेतें दो पल सुकून के तो जिन्दगी का क्या बिगङ जाता॥
94-लब्जों से बयाँ न कर सकें तो कोई गम नहीं
सुना है मुहब्बत में नजरें भी बातें करती हैं॥
95-मार ही डाला आखिर तेरी अदाओं नें हमें
वरना अपने हाँथों की लकीरें काफी लम्बी हुआ करती थीं॥
96-अब तो खिलौनों से दिल बहलता नहीं अपना
जबसे खिलौना बनाकर उसनें खेला है हमें॥
97-कतरा कतरा कर के जिन्दगी जुटाते जा रहे हैं
धीरे धीरे कर के तुझपे लुटाते जा रहे हैं॥
98-कितने हँसीं वो बिछङे जमाने होते थें
फूलों में कलियों में अपने आशियाने होते थें॥
99-गज़ल में दिल के अपने सारे अरमान निकल जाते हैं
रूठकर धङकनें दिल से अपनी खुद ही बहल जाते हैं॥
100-खुदा नें उन्हें बनाया है सिर्फ हमारे लिये
झेल लेंगें उनके बिना ये जिन्दगी कुँवारे लिये॥
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अंतरिक्ष के रहस्य (हिन्दी)
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